विलियम्स सिंड्रोम को विलियम्स-ब्यूरेन सिंड्रोम भी कहा जाता है, एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है। यह कई विकासात्मक समस्याओं का कारण बन सकता है। इन समस्याओं में हृदय और रक्त वाहिका संबंधी समस्याएं (रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना), मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं और सीखने में कठिनाई शामिल है। विलियम्स सिंड्रोम एसोसिएशन के अनुसार यह विकार 10,000 लोगों में से लगभग किसी एक को होता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर एंड स्ट्रोक के अनुसार, आमतौर पर यह रैंडम्ली (क्रमरहित) आनुवंशिक परिवर्तन की वजह से होता है, नाकि वंशानुगत वजह से होता है। यदि कोई व्यक्ति इस सिंड्रोम से प्रभावित है तो उसके बच्चे में इस बीमारी के पारित होने का 50 प्रतिशत जोखिम होता है।

वैज्ञानिकों ने पाया है कि क्रोमोसोम यानी गुणसूत्र 7 की अनुपस्थिति की वजह से विलियम्स सिंड्रोम हो सकता है। इस अनुपस्थिति वाले जगह पर लगभग 25 जीन होते हैं। इनके न होने की वजह से संचार प्रणाली से जुड़ी समस्याएं और हृदय रोग जैसे विकार होना आम है।

विलियम्स सिंड्रोम के लक्षण - Williams Syndrome Symptoms in Hindi

यह सिंड्रोम कई लक्षणों का एक समूह है जो एक साथ होता है। विलियम्स सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें विशिष्ट लक्षण होते हैं, जो शरीर के स्वास्थ्य और विकास को प्रभावित करते हैं। इस सिंड्रोम के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं :

  • चेहरे की असामान्य बनावट जैसे चौड़ा मुंह, छोटी व उठी हुई नाक और दांत के बीच ज्यादा जगह
  • खाने में कठिनाई (और पढ़ें - निगलने में कठिनाई)
  • एडीएचडी 
  • सीखने में दिक्कत
  • सबसे छोटी उंगली का अंदर की ओर मुड़ा होना
  • कद छोटा होना (और पढ़ें - बौनेपन का कारण)
  • बोलने में देरी
  • धंसी हुई छाती
  • इंट्लेक्चुअल डिसएबिलिटी (जैसे सीखने, प्रॉब्लम को सॉल्व करने या निर्णय लेने में कठिनाई)
  • जन्म के समय वजन और मांसपेशियों की टोन में कमी
  • किडनी में असामान्यताएं
  • पास की नजर कमजोर होना

(और पढ़ें - धुंधला होना क्या है)

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विलियम्स सिंड्रोम के कारण - Williams Syndrome Causes in Hindi

विलियम्स सिंड्रोम से ग्रस्त शिशुओं में कुछ जीन का अभाव (अनुपस्थिति) होता है। लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कौन-से जीन अनुपस्थित हैं। उदाहरण के लिए, ईएलएन नामक जीन के बिना जन्म लेने वाले व्यक्ति को हृदय और रक्त वाहिका संबंधी समस्याएं होंगी।

आमतौर पर शुक्राणु या अंडे में कुछ जीन गायब हो जाते हैं। बहुत कम मामले ऐसे होते हैं कि यह समस्या माता-पिता से बच्चों में पारित होती है।

विलियम्स सिंड्रोम का निदान - Williams Syndrome Diagnosis in Hindi

आमतौर पर शारीरिक विशेषताओं के आधार पर निदान किया जा सकता है। इसके अलावा एफआईएसएच नामक टेस्ट के जरिये भी बीमारी की पुष्टि की जा सकती है। यह एक लैब टेस्ट है, जो कोशिकाओं में जीन परिवर्तन के बारे में बताता है। यह वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करता है कि जीन गायब है या नहीं।

कुछ अन्य टेस्ट भी हैं जो निदान में मदद कर सकते हैं जैसे किडनी अल्ट्रासाउंड, ब्लड प्रेशर चेक और इकोकार्डियोग्राम

विलियम्स सिंड्रोम का उपचार - Williams Syndrome Treatment in Hindi

विलियम्स सिंड्रोम के लिए कोई सटीक इलाज नहीं है। उपचार का लक्ष्य सिंड्रोम से जुड़े लक्षणों को कम करना है। सिकुड़ी हुई रक्त वाहिकाओं को ठीक करने के लिए फिजिकल थेरेपी और स्पीच थेरेपी फायदेमंद हो सकती है।

उपचार आमतौर पर व्यक्ति के लक्षणों पर आधारित होता है ऐसे में कोई मानक उपचार प्रोटोकॉल नहीं है। हृदय प्रणाली और किसी भी संभावित समस्याओं को ट्रैक करने के लिए नियमित जांच की आवश्यकता होती है।

विलियम्स सिंड्रोम वाले लोगों को अतिरिक्त कैल्शियम और विटामिन डी लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इन पदार्थों का खून में स्तर पहले से ही अधिक होता है।

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Dr. Farhan Shikoh

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