सांडे का तेल पारंपरिक आयुर्वेदिक तेलों का मिश्रण है, जिसका मुख्य रूप से पुरुषों की सेक्स समस्या को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. यह तेल स्तंभन दोष और शीघ्रपतन की समस्या को दूर करने लिए प्राकृतिक सहायता के रूप में किया जाता है. हालांकि, इस तेल के इस्तेमाल से कुछ नुकसान, जैसे- त्वचा पर रैशेज, उल्टी व सूजन भी हो सकती है.
आज हम इस लेख में सांडे के तेल के फायदे और नुकसान के बारे में जानेंगे -
(और पढ़ें - जात्यादि तेल के फायदे)
- सांडे का तेल क्या है और इसकी सामग्री?
- सांडे के तेल के फायदे
- कैसे करें सांडे के तेल का इस्तेमाल
- सांडे के तेल के नुकसान
- सारांश
सांडे का तेल क्या है और इसकी सामग्री?
सांडे का तेल कई तरह के आयुर्वेदिक तेलों का मिश्रण है, जिसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक उपचार और अन्य पारंपरिक दवाओं के रूप में काफी ज्यादा किया जाता है. हालांकि, विभिन्न निर्माता कंपनियों द्वारा इस तेल में मौजूद सामग्रियां (जड़ी-बूटियां) अलग-अलग हो सकती है. सांडे के तेल में आमतौर पर निम्नलिखित जड़ी-बूटियों का मिश्रण होता है-
- अश्वगंधा
- शतावरी
- लौंग का तेल
- काले जीरे का तेल
- तिल का तेल
- मखमली बीन
- धतूरे का अर्क
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सांडे के तेल के फायदे
सांडे के तेल के इस्तेमाल से पुरुषों की कई समस्याओं, जैसे- वीर्य की गुणवत्ता में सुधार, शीघ्रपतन की समस्या व इनफर्टिलिटी को दूर किया जा सकता है. साथ ही इससे महिलाओं की प्रजनन क्षमता में भी सुधार हो सकता है. आइए, सांडे के तेल से होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं -
स्तंभन दोष
पुरुषों के लिए सांडे का तेल फायदेमंद हो सकता है. इस तेल के इस्तेमाल से पुरुषों में स्तंभन दोष को दूर किया जा सकता है. हालांकि, सांडे का तेल स्तंभन दोष को दूर करने में प्रभावकारी है, लेकिन इस पर कोई वैज्ञानिक शोध या अध्ययन नहीं हुआ है. इस तेल में मौजूद तत्वों जैसे- अश्वगंधा, लौंग का तेल व धतूरे का अर्क स्तंभन दोष को दूर करने में प्रभावी हो सकता है.
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वीर्य की गुणवत्ता में सुधार
सांडे के तेल में मौजूद अश्वगंधा रक्त वाहिकाओं को बड़ा या पतला कर सकता है और पूरे शरीर में ऑक्सीजन के स्तर और रक्त के प्रवाह में सुधार कर सकता है. रिसर्च में पाया गया है कि अश्वगंधा के इस्तेमाल से शरीर में हार्मोन के स्तर को संतुलित किया जा सकता है, जिससे पुरुषों में वीर्य की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है.
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शीघ्रपतन की समस्या से दिलाए निजात
सांडे के तेल के इस्तेमाल से शीघ्रपतन की समस्या से निजात पाया जा सकता है. इस तेल में मौजूद सामग्री आपके शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर कर सकती है, जिससे शीघ्रपतन की समस्या दूर हो सकती है. साथ ही इससे कई अन्य फायदे हो सकते हैं.
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प्रजनन क्षमता के लिए बेहतर
सांडे के ऑयल में शतावरी व अश्वगंधा का मिश्रण होता है, जो शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर करने में असरदार हो सकता है. रिसर्च के मुताबिक, शतावरी और अश्वगंधा महिला व पुरुष की प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने में असरदार हो सकता है. ये आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां इनफर्टिलिटी की समस्या को दूर कर सकती हैं.
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स्टैमिना बढ़ाए
सांडे तेल का नियमित रूप से इस्तेमाल करने से कामेच्छा और सेक्स के दौरान समय में वृद्धि हो सकती है. दरअसल, सांडे के तेल में मौजूद सामाग्री जैसे- शतावरी, अश्वगंधा व लौंग का तेल शीघ्रपतन के लिए जिम्मेदार अत्यधिक उत्तेजित नसों को आराम देता है, जिससे आपके शरीर का स्टेमिना बढ़ सकता है.
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सूजन व ब्लड शुगर करे कम
रिसर्च में देखा गया है कि सांडे के तेल में मौजूद काला जीरा शरीर में सूजन को कम करने और फेफड़ों में रक्त वाहिकाओं को फैलाने में आपकी मदद कर सकता है. साथ ही यह रक्त में शर्करा के स्तर और लिपिड या कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित करने में भी मदद कर सकता है.
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कैसे करें सांडे के तेल का इस्तेमाल
सांडे के तेल का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्किन पर किया जाता है. यौन क्रिया से लगभग 30 मिनट पहले लिंग पर इस तेल की मालिश करने से आपको लाभ हो सकता है. सांडे के तेल में सक्रिय तत्व स्किन के माध्यम से शरीर में अवशोषित होते हैं.
बेहतर रिजल्ट के लिए आप इस तेल का इस्तेमाल करीब तीन महीने तक लगातार करें. हालांकि, यह निर्धारित करने के लिए कोई चिकित्सा अध्ययन नहीं किया गया है कि कितनी बार सांडे का तेल का उपयोग किया जाना चाहिए और यह कितनी देर तक इसे स्किन पर लगाना चाहिए.
सांडे के तेल के नुकसान
सांडा तेल कितना प्रभावकारी है और इससे क्या नुकसान हो सकते हैं, इस पर अभी तक कोई मेडिकल रिसर्च मौजूद नहीं है. वहीं, इस तेल में मौजूद तत्वों पर कुछ अच्छे अध्ययन मिलते हैं. हालांकि, अभी इसे लेकर और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है. ध्यान रखें कि सांडा तेल में मौजूद कुछ तत्व त्वचा की एलर्जी या कुछ लोगों में नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं.
उदाहरण के लिए, यदि आपको तिल से एलर्जी है, तो सांडा के तेल से भी आपको एलर्जी हो सकती है, क्योंकि इस तेल में तिल का मिश्रण होता है. ऐसे में आपको सांडा तेल का इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए. ताकि इसके साइड-इफेक्ट से बचा जा सके. सांडा तेल में मौजूद तत्वों से एलर्जी होने पर आपको कुछ लक्षण दिख सकते हैं, जैसे -
- स्किन पर लाल चकत्ते
- स्किन लाल होना
- खुजली होना
- सूजन
- सांस लेने में परेशानी
- जी मिचलाना या उल्टी जैसा अनुभव होना
- हृदय की गति कम होना
- पेट दर्द
- लो ब्लड प्रेशर इत्यादि
ध्यान रखें कि अगर आपको सांडा तेल के इस्तेमाल से एनाफिलेक्सिस जैसे गंभीर एलर्जी प्रतिक्रिया के कोई लक्षण दिख रहे हैं, तो इस स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें. हालांकि, कुछ मामलों में सांडा तेल में मौजूद सामग्री से एलर्जी न होने पर भी आपकी स्किन में जलन या संवेदनशीलता महसूस हो सकती है. इसकी वजह से आपकी स्किन पर लालिमा, खुजली व जलन जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं. ऐसी स्थिति से बचने के लिए यौन क्रिया के लिए सांडा तेल का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें.
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सारांश
सांडा तेल प्राकृतिक तेलों का मिश्रण है, जिसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक चिकित्सा में यौन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है. यह शीघ्रपतन सहित कुछ यौन रोगों के इलाज में काफी प्रभावी हो सकता है. यह तेल पुरुषों के लिए काफी अच्छा माना जा सकता है. सांडा तेल में मौजूद हर्बल तत्व, रक्त प्रवाह में सुधार करने और अन्य प्रभाव डालने में मदद कर सकता है, लेकिन ध्यान रखें कि सांडा तेल पर कोई चिकित्सा अध्ययन नहीं किया गया है, लेकिन इस तेल में मौजूद जड़ी-बूटियों पर कई नैदानिक अध्ययन किया गया है. इसलिए, डॉक्टर की सलाह पर इसका इस्तेमाल करें, ताकि इससे होने वाले साइड-इफेक्ट से बचा जा सके.
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