बाजारों में कई प्रकार के कुकिंग ऑयल मौजूद है जैसे कि सरसों का तेल,ऑलिव ऑयल, सनफ्लावर ऑयल, कोकोनट ऑयल, पीनट ऑयल, एवोकैडो ऑयल, कॉर्न ऑयल, वेजिटेबल ऑयल इत्यादि. कुकिंग ऑयल का भारतीय खाने में खूब इस्तेमाल किया जाता है और यह सेहत को भी बहुत प्रभावित करता है कि आप किस प्रकार का कुकिंग ऑयल उपयोग कर रहें है, कितनी मात्रा में और किस प्रकार से उपयोग कर रहें है. आज इस लेख में हम जानेंगे कि कुकिंग ऑयल के फायदे और नुकसान के बारे में.
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सरसों का तेल
सरसों का तेल सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला कुकिंग ऑयल है. खाना बनाने के अलावा भी इसको कई अन्य कामों में उपयोग किया जाता है. इसके कुछ औषधीय फायदे होने के साथ ही इसका अत्यधिक मात्रा में सेवन करने पर इसके दुष्प्रणाम भी देखने को मिलते है.
फायदे
- सरसों का तेल भूख बढ़ाने के साथ-साथ वजन घटाने में भी मदद करता है.
- यह दांत दर्द, जोड़ों के दर्द, त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद होता है.
- यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है एवं अस्थमा की रोकथाम में भी मदद करता है.
नुकसान
- सरसों के तेल में ईरुसिक एसिड और यूरिक एसिड उच्च स्तर मे मौजूद रहता है इसलिए इसका भारी मात्रा मे सेवन करने से सांस व दिल से जुड़ी बीमारियां, दस्त, एनीमिया, कैंसर, कोमा और यहां तक कि सबसे गंभीर मामलों में मौत होने की भी संभावना होती है.
- गर्भवास्था में सरसों के तेल का उपयोग करना, शिशु के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता हैं.
- इसके लगातार सेवन करने से राइनाइटिस भी हो सकता है.
ऑलिव ऑयल
ऑलिव ऑयल लोगों के बीच सबसे लोकप्रिय कुकिंग ऑयल है. ऑलिव ऑयल को सुपरफूड माना जाता है क्योंकि इसके अंदर हृदय से संबंधित समस्याओं से लड़ने के गुण मौजूद होते हैं लेकिन यह सभी स्थितियों के लिए आदर्श नहीं माना जाता है.
फायदे
- यह वजन को नियंत्रण, सूजन और ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है.
- यह हृदय की बीमारी एवं ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को भी कम करता है.
नुकसान
- जिन लोगों को इससे एलर्जी है, उन्हें डर्मेटाइटिस, वजन बढ़ना और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती है.
- यह शरीर में बैड-फैट भी प्रोड्यूस करता है.
- यह ऑयल फ्राई करने के लिए उपयुक्त नहीं है. इससे फ्राई करने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
वेजिटेबल ऑयल
ये आमतौर पर मकई, ताड़, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसे विभिन्न तेलों के मिश्रण से मिलकर तैयार किए जाते है.
फायदे
- यह बहुत ही सस्ता होता है और इसकी लंबी शेल्फ लाइफ होती है.
- इसमें उच्च स्तर के अच्छे फैटी एसिड पाए जाते हैं.
नुकसान
- ये आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (जीएमओ) से निकाले गए इनग्रेडिएंट्स से प्रोसेस्ड होता है.
- कुछ वेजीटेबल ऑयल आंशिक रूप से हाइड्रोजेनेटेड होते हैं, जो तेल में मौजूद अच्छे फैटी एसिड को नष्ट कर देते हैं जिससे ट्रांस फैटी एसिड का निर्माण हो जाता है, जो वजन और हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकते है.
कोकोनट ऑयल
कोकोनट ऑयल स्वाद से भरपूर होता है और अधिकांश लोग इसे सबसे स्वस्थ मानते हैं.
फायदे
- इसमें उच्च मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट उपस्थित होते हैं.
- इसमें स्मोक प्वाइंट होता है, जिससे इसका उपयोग फ्राई करने में भी किया जा सकता है.
- कुछ शोध कोकोनट ऑयल को अल्जाइमर रोग के प्रति संवेदनशील और बुजुर्ग लोगों के मस्तिष्क में स्वास्थ्य के लिए बेहतर मानते हैं.
- बालों के लिए भी यह तेल बहुत लाभकारी होता है.
नुक़सान
- कोकोनट ऑयल का प्राकृतिक स्वाद विशिष्ट व्यंजनों के विशेष स्वाद पर हावी हो सकता है.
- इसमें सैचुरेटेड फैट की उच्च मात्रा पाई जाती है.
कॉर्न ऑयल
कॉर्न ऑयल सुनहरे पीले रंग का होता है. इसे कॉर्न की गुठली से निकाला जाता है और यह खाना पकाने और तलने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है लेकिन इसका उपयोग करते हुए भोजन को केवल मध्यम तापमान पर ही पकाना चाहिए.
फायदे
कॉर्न ऑयल में फाइटोस्टेरॉल बहुत होता है जो कि हृदय रोग, टाइप 2 मधुमेह, और कुछ कैंसर जैसी कुछ स्थितियों का खतरा कम हो सकता है.
नुकसान
कॉर्न ऑयल में विटामिन ई और फाइटोस्टेरॉल जैसे कुछ स्वस्थ घटक होते हैं, लेकिन कुल मिलाकर इसे हेल्दी फैट नहीं माना जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि यह अत्यधिक रिफाइन्ड और इन्फ्लेमेट्री ओमेगा-6 फैट में उच्च है.
नोट - यहां पर हमने आपको कुछ खास कुकिंग ऑयल के फायदे और नुकसान बताए हुए है, जो ज्यादातर लोग इस्तेमाल करते है. इसका चयन आप अपने स्वास्थ्य और डॉक्टर की सलाह पर ही करें.