आज कल के खानपान और अनियमित जीवनशैली के कारण आंख से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसी तरह आँखों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है ऑक्युलर हाइपरटेंशन या सरल भाषा में कहें तो आँखों का ब्लड प्रेशर बढ़ जाना जिसे अक्सर लोग दिल से जुड़ी बीमारी समझ लेते हैं , लेकिन यह आंखों से जुड़ी एक गंभीर समस्या है । कई शोध और अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि 40 साल से अधिक उम्र के लगभग 10 प्रतिशत लोगों की आँखों का ब्लड प्रेशर ज्यादा रहता है। इसे एक तरह का मोतियाबिंद भी समझा जाता है। जब आंख के फ्रंट एरिया में मौजूद तरल पदार्थ जब पूरी तरह से नहीं सूखता है तब यह समस्या उत्पन्न होती है। आइये जानते हैं ऑक्युलर हाइपरटेंशन (Ocular Hypertension) के कारण, लक्षण और इलाज के बारे में।

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  1. ऑक्युलर हाइपरटेंशन क्या है?
  2. ऑक्युलर हाइपरटेंशन के लक्षण
  3. ऑक्युलर हाइपरटेंशन के कारण
  4. ऑक्युलर हाइपरटेंशन का जोखिम किसे है?
  5. ऑक्युलर हाइपरटेंशन की जांच कैसे की जाती है?
  6. नेत्र उच्च रक्तचाप का इलाज कैसे किया जाता है?
  7. सारांश

इसे नेत्रीय उच्च रक्तचाप भी कहते हैं , ये तब होता है जब आंख में दबाव या ब्लड प्रेशर नॉर्मल से ज्यादा होने लगता है । आंख के सामने की एरिया में मौजूद फ्लूइड जब पूरी तरह से सूखता नहीं है तो इसकी वजह से आंखों में प्रेशर बढ़ता है। जब आंख में प्रेशर नॉर्मल से अधिक हो जाता है तो इस स्थिति को ऑक्युलर हाइपरटेंशन कहा जाता है। इस गंभीर बीमारी के कारण आंख से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं जैसे ग्लूकोमा की समस्या आदि। लेकिन ऑक्युलर हाइपरटेंशन , ग्लूकोमा से अलग हैं। ऑक्युलर हाइपरटेंशन में ऑप्टिक तंत्रिका सामान्य दिखती है और दृष्टि जाने की संभावना न के बराबर होती है। हाँ लेकिन जिन्हें ऑक्युलर हाइपरटेंशन होता है , उन्हें ग्लूकोमा होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। 

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ऑक्युलर हाइपरटेंशन में आमतौर पर कोई संकेत या लक्षण नहीं होते हैं। क्योंकि आँखों में उच्च दबाव हो रहा है , आपको इसका पता भी नहीं चलता, इसलिए ऑक्युलर हाइपरटेंशन की जाँच के लिए अपने नेत्र रोग विशेषज्ञ से नियमित रूप से आँखों की जाँच करवाना ज़रूरी है। ऑक्युलर हाइपरटेंशन की समस्या से बचाव के लिए आपको 40 साल के बाद नियमित रूप से आंखों की जांच करनी चाहिए। हालांकि यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है इसलिए इसके लक्षण दिखने पर आपको डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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हमारी आंख के सामने वाले भाग में एक साफ तरल पदार्थ बहता है जिसे एक्वियस ह्यूमर कहते हैं। आपकी आंख लगातार एक्वियस ह्यूमर बनाती है और इसकी एक समान मात्रा आपकी आंख से बाहर निकलती है। जिस से आंखों पर लगातार दबाव नहीं बनता है और आँखें स्वस्थ रहती हैं ।

लेकिन अगर यही तरल पदार्थ ठीक से बाहर न निकले , तो दबाव बनता है और इसी कारण ऑक्युलर हाइपरटेंशन होता है , और यही अगर उच्च दबाव ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान पहुंचाता है , जिस से ग्लूकोमा होने का खतरा बना रहता है , और ग्लूकोमा होने से दृष्टि जाने का खतरा भी बना बढ़ जाता है। 

आंख में ऑक्युलर हाइपरटेंशन की समस्या कुछ दवाओं के सेवन की वजह से हो सकती है। स्टेरॉयड दवाओं के सेवन की वजह भी यह समस्या हो सकती है इसके अलावा अस्थमा और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का सेवन भी इस स्थिति का कारण बन सकती है।

आंख में चोट लगने के कारण ऑक्युलर हाइपरटेंशन की समस्या हो सकती है। आंख में लगने वाली गंभीर चोट के कारण आंख के भीतर प्रेशर बढ़ सकता है जिसकी वजह से आपको यह समस्या हो सकती है।

इसके अलावा, वंश, उम्र और पारिवारिक इतिहास ऑक्युलर हाइपरटेंशन और ग्लूकोमा के कारण ऑक्युलर हाइपरटेंशन की समस्या हो सकती है। 40 साल की उम्र के बाद मरीजों में यह समस्या बढ़ सकती है और इसका जोखिम ज्यादा होता है।

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किसी को भी ऑक्युलर हाइपरटेंशन हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इस स्थिति का जोखिम अधिक होता है। इनमें शामिल हैं:

  • जिनके परिवार में ऑक्युलर हाइपरटेंशन या ग्लूकोमा का इतिहास हो
  • मधुमेह या उच्च रक्तचाप वाले लोग 
  • 40 वर्ष से अधिक आयु के लोग
  • जो लोग बहुत निकट दृष्टि वाले हैं
  • लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाएँ लेने वाले लोग 
  • अगर आंखों में चोट हो या सर्जरी हुई हो
  • पिगमेंट डिस्पर्शन सिंड्रोम या स्यूडोएक्सफोलिएशन सिंड्रोम से पीड़ित लोग 

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जब भी आप ऑक्युलर हाइपरटेंशन की जांच कराने डॉक्टर के पास जाएंगे तो सबसे पहले वो आपकी आँखों के दवाब की जांच करेंगे। इस परीक्षण के दौरान, आपकी आंख को आई ड्रॉप डाल कर ​​सुन्न किया जाता है। और फिर टोनोमीटर नाम के उपकरण का उपयोग करके कॉर्निया के दबाव को मापा जाता है। आप पैचीमीटर नामक उपकरण से कॉर्नियल मोटाई माप भी करवा सकते हैं। यह एक सरल और जल्दी हो जाने वाली जांच है , जिस से आँखों में होने वाली परेशानी को ज्यादा अच्छे से समझ जा सकता है । हो सकता है आपके डॉक्टर ग्लूकोमा की भी जांच करें । 

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इससे पहले कि आँखों की रौशनी चली जाए या तंत्रिका को नुकसान पहुंचे, आँखों का दवाब कम करना महत्वपूर्ण है। अगर आपकी आँखों का दबाव बहुत थोड़ा बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर शुरू में सीधे उपचार शुरू न कर के नियमित परीक्षण के ज़रिए दबाव की निगरानी करेंगे। आपको अपने इंट्राओकुलर दबाव को कम करने के लिए आई ड्रॉप दवा की आवश्यकता है। वे दवा शुरू करने के कुछ समय बाद ये देखेंगे की यह कैसे काम कर रही है। कभी-कभी, डॉक्टर एक से ज़्यादा दवाएँ लिख सकते हैं। यह ज़रूरी है कि आप निर्देशों का ठीक से पालन करें ताकि दवा अच्छे से काम करे । कभी-कभी, आँखों के दबाव को कम करने के लिए लेज़र या सर्जरी भी की जा सकती है। उपचार से ग्लूकोमा का खतरा कम किया जा सकता है , लेकिन पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता ।

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अपनी आँखों की देखभाल आप सिर्फ तब न करें जब ऑक्यूलर हाइपरटेंशन हो , बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, अपनी आँखों को नुकसान से बचाना और जोखिम कारकों के बारे में जागरूक होना भी महत्वपूर्ण है । याद रखें, कि ऑक्यूलर हाइपरटेंशन हमेशा ग्लूकोमा का कारण नहीं बनता है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है जिस पर बारीकी से नज़र रखने की ज़रूरत होती है।

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