योग के कई लाभ हैं। प्रेग्नेन्सी के बाद होने वाले अवसाद को कम करने से लेकर दिल की बीमारियों के मरीजों को मदद करने तक योग के बहुत फायदे हैं। आपकी पैर की उंगलियों से आपके सिर तक योग शरीर के हर हिस्से को कुछ ना कुछ लाभ देता है। और हाँ, इसमें आपका पेट भी शामिल है। कब्ज, गैस, और अन्य पेट की परेशानियों का सबसे आम कारण हमारे अस्वास्थ्यकर, तेज गति वाले जीवन शैली से जोड़ा जा सकता है। खराब खाना, तनाव, और व्यस्त दिनचर्या आपके पाचन तंत्र में कठोर मल (या फिर दस्त) या फिर कब्ज के रूप में प्रकट हो सकते हैं। (और पढ़ें - पेट मे गैस का घरेलू उपचार)
- कैसे कब्ज में लाभदायक है योग - How Does Yoga Help with Constipation?
- बालासन है कब्ज का इलाज - Balasana (Child's Pose) for Constipation in Hindi
- सुप्त मत्स्येन्द्रासन आसन है कब्ज के लिए फायदेमंद - Supta Matsyendrasana (Lying Half Lord of the Fishes Pose) for Constipation in Hindi
- अर्ध मत्स्येन्द्रासन आसन है कब्ज के लिए फायदेमंद - Ardha Matsyendrasana (Half Lord of the Fishes Pose) for Constipation in Hindi
- पवन्मुक्तासन करेगा कब्ज के उपचार में सहायता - Pawanmuktasana (Wind
- परिवृत्त त्रिकोणासन करेगा कब्ज की ट्रीटमेंट में फायदा - Parivrtta Trikonasana (Revolved Triangle Pose) for Constipation in Hindi
- शवासन करेगा कब्ज की ट्रीटमेंट में फायदा - Shavasana (Corpse Pose) for Constipation in Hindi
कैसे कब्ज में लाभदायक है योग - How Does Yoga Help with Constipation?
योग ऐसी सभी पाचन मुसीबतों और असुविधाओं को कम करने में मदद कर सकता है। योग दो तरीकों से कब्ज दूर करता है: सबसे पहले, यह आपके तनाव प्रतिक्रिया को प्रबंधित करने में मदद करता है, जो आपके पाचन तंत्र के कामकाज में काफी सुधार कर सकता है। जैसा कि आप शायद जानते हों, जब आप तनाव में होते हैं तब आपको "अवरुद्ध" होने की अधिक संभावना होती है। ऐसे में ध्यान और प्राणायाम बहुत लाभ देते हैं। दूसरा तरीका जिस से पाचन तंत्र को लाभ मिलता है वो है उन योगासन से जो कि पाचन अंगों की मालिश करता है, रक्त और ऑक्सीजन प्रवाह बढ़ाते हैं। ऐसा होने से आपके पाचन तंत्र से मल के निकलने में आसानी होती है। नियमित रूप से योग करना स्वस्थ आंत्र के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। तो आइए जानें की कौन से योगासन कब्ज से निजात दिलाते हैं।
बालासन है कब्ज का इलाज - Balasana (Child's Pose) for Constipation in Hindi
बालासन में आपके संपूर्ण शरीर को आराम मिलता है। यह ना ही कब्ज कम करता है बल्कि थकान ममिटाने में भी मदद करता है। बालासन को 1-2 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: बालासन करने का तरीका और फायदे)
सुप्त मत्स्येन्द्रासन आसन है कब्ज के लिए फायदेमंद - Supta Matsyendrasana (Lying Half Lord of the Fishes Pose) for Constipation in Hindi
सुप्त मत्स्येन्द्रासन बहुत ही आसान आसान है और कब्ज के लिए बेहत लाभदायक है क्योंकि इस से आपके पेट और आँत उत्तेजित होते हैं। इस आसन को 1-2 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: सुप्त मत्स्येन्द्रासन करने का तरीका और फायदे)
अर्ध मत्स्येन्द्रासन आसन है कब्ज के लिए फायदेमंद - Ardha Matsyendrasana (Half Lord of the Fishes Pose) for Constipation in Hindi
अर्ध मत्स्येन्द्रासन में भी आपका धड़ मुड़ा होता है, जिस से आपके पेट में से दूषित पदार्थ बहार निकलते हैं और पाचन तंत्र में सुधार होता है। इस आसन को 1-2 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: अर्ध मत्स्येन्द्रासन करने का तरीका और फायदे)
पवन्मुक्तासन करेगा कब्ज के उपचार में सहायता - Pawanmuktasana (Wind
पवन्मुक्तासन नाम से ही पता चलता है की यह आपके पेट से गैस को बहार निकालने में मदद करता है और कब्ज से राहत देता है। पवन्मुक्तासन को 1 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: पवनमुक्तासन करने का तरीका और फायदे)
परिवृत्त त्रिकोणासन करेगा कब्ज की ट्रीटमेंट में फायदा - Parivrtta Trikonasana (Revolved Triangle Pose) for Constipation in Hindi
परिवृत्त त्रिकोणासन में आपका धड़ और भी ज़्यादा मुड़ा होता है। इस से आपके पाचन अंगों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है और कब्ज से राहत मिलती है। इस आसन को भी 1 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: परिवृत्त त्रिकोणासन करने का तरीका और फायदे)
परिवृत्त त्रिकोणासन के बाद आप परिवृत्त पार्श्वकोणासन भी कर सकते हैं। यह भी कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है। परिवृत्त पार्श्वकोणासन को 1 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: परिवृत्त पार्श्वकोणासन करने का तरीका और फायदे)
शवासन करेगा कब्ज की ट्रीटमेंट में फायदा - Shavasana (Corpse Pose) for Constipation in Hindi
शवासन में आपका शरीर सबसे अधिक आराम की स्तिथि में होता है। अपने योगाभ्यास के बाद इसे ज़रूर करें। शवासन 5-10 मिनिट के लिए करें। (और पढ़ें: शवासन करने का तरीका और फायदे)
इन बातों का खास तौर से ध्यान रखें:
- याद रहे की योगाभ्यास से आराम निरंतर अभ्यास करने के बाद ही मिलता है और धीरे धीरे मिलता है।
- योगासन से जोड़ों का दर्द बढे नहीं, इसके लिए अभ्यास के दौरान शरीर को सहारा देने वाली वस्तुओं, तकियों व अन्य उपकरणों की सहायता जैसे ज़रूरी समझें वैसे लें।
- अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न दें। अगर दर्द बढ़ जाता है तो तुरंत योगाभ्यास बंद कर दें व चिकित्सक से परामर्श करें।
- यह ज़रूर पढ़ें: योग के नियम।
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